डिफॉल्ट से जब्ती तक की विधिक समय-सीमा
बैंक किसी भी स्थिति में एकाएक संपत्ति को अपने नियंत्रण में नहीं ले सकता। पूरी प्रक्रिया में वैधानिक समय सीमा निर्धारित है:
- 1 से 89 दिन (Special Mention Accounts): खाता केवल SMA-0, 1, 2 श्रेणी में रहता है। बैंक केवल साधारण अनुस्मारक (Reminder) प्रेषित कर सकता है।
- 90वां दिन (NPA वर्गीकरण): 90 दिन पूर्ण होने पर ही खाता औपचारिक रूप से गैर-निष्पादित आस्ति माना जाता है।
- धारा 13(2) के 60 दिन: दो माह का अनिवार्य मांग पत्र काल।
- सांकेतिक व भौतिक कब्जा: न्यूनतम 30 दिनों का नीलामी नोटिस। इस प्रकार सामान्यतः 6 से 9 माह का समय विधिक रूप से आवश्यक होता है।
रिकवरी उत्पीड़न के विरुद्ध विधिक संरक्षण
भारतीय रिजर्व बैंक के Fair Practices Code के तहत ऋणदाताओं एवं उनके प्रतिनिधियों पर सख्त प्रतिबंध लागू हैं:
- रिकवरी दल केवल सुबह 8:00 बजे से सायं 7:00 बजे के मध्य ही संपर्क कर सकता है।
- परिजनों, कार्यस्थल अथवा सामाजिक संबंधों में प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाने का प्रयास विधिक अपराध है।
- अभद्र भाषा, धमकी अथवा जबरन प्रवेश की दशा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अधीन आपराधिक शिकायत का प्रावधान है।
परिसंपत्ति संरक्षण के विधिक व व्यावहारिक विकल्प
- ऋण अवधि का पुनर्गठन (Tenure Restructuring): मासिक देयता कम करने हेतु बैंक से लोन अवधि विस्तार का औपचारिक आवेदन।
- One-Time Settlement (OTS): एकमुश्त भुगतान की क्षमता होने पर दंडात्मक ब्याज में छूट सहित औपचारिक समझौता।
- न्यायिक संरक्षण: मनमानी कार्यवाही की दशा में Debts Recovery Tribunal के माध्यम से स्थगन आदेश प्राप्त करना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या ऋण डिफॉल्ट होने पर पुलिस द्वारा कारावास हो सकता है?
नहीं। लोन डिफॉल्ट एक सिविल मामला है, यह कोई आपराधिक अपराध नहीं है। इसके लिए सीधे पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का कोई प्रावधान नहीं है।
यदि नीलामी के उपरांत भी ऋण शेष रह जाए तो बैंक क्या कर सकता है?
बैंक बाकी बची राशि के लिए DRT में मूल दावा (Original Application) दाखिल कर सकता है, लेकिन इसके लिए भी कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है।
यदि नीलामी में संपत्ति से ऋण राशि से अधिक प्राप्ति हो?
बैंक केवल अपना बकाया कर्ज और स्वीकृत खर्च ही रख सकता है। अतिरिक्त बची हुई पूरी राशि कर्जदार को वापस लौटाना कानूनन अनिवार्य है।