Statutory Defense & Notice Reply

SARFAESI Section 13(2) व 13(4) नोटिस का जवाब

बैंक का 60 दिनों का मांग पत्र प्राप्त होने पर समय रहते धारा 13(3A) के तहत तकनीकी विधिक आपत्ति दर्ज करना ही संपत्ति की सुरक्षा का प्राथमिक आधार बनता है।

बैंक के SARFAESI Section 13 Notice का कानूनी जवाब कैसे दें?

धारा 13(2) डिमांड नोटिस का विधिक अभिप्राय

ऋण खाता NPA होने की दशा में बैंक धारा 13(2) के अंतर्गत 60 दिनों का मांग पत्र जारी करता है। इसमें बैंक समस्त देयताओं का ब्योरा प्रस्तुत करते हुए संपूर्ण राशि के भुगतान की अपेक्षा करता है। इस नोटिस का प्राथमिक विधिक प्रभाव यह है कि इसके उपरांत उधारकर्ता गिरवी रखी संपत्ति को बैंक की लिखित पूर्व सहमति के बिना हस्तांतरित अथवा भारित नहीं कर सकता।

धारा 13(3A) के अंतर्गत आपत्ति प्रस्तुत करने का अधिकार

SARFAESI अधिनियम की धारा 13(3A) उधारकर्ता को 60 दिनों के नोटिस पर तथ्यपरक विधिक आपत्तियां प्रस्तुत करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करती है।

  • सकारण आदेश की अनिवार्यता: Mardia Chemicals फैसले के अनुसार बैंक उधारकर्ता की आपत्ति को बिना परीक्षण खारिज नहीं कर सकता। 15 दिनों के भीतर लिखित में कारण संप्रेषित करना विधिक रूप से बाध्यकारी है।
  • भविष्य की कार्यवाही का शून्यीकरण: यदि बैंक ने धारा 13(3A) आपत्ति का उत्तर दिए बिना सीधे धारा 13(4) के तहत कार्यवाही की, तो ऐसी संपूर्ण कार्यवाही विधि विरुद्ध घोषित हो जाती है।
वीडियो व्याख्यान · Hanmat Lodhi Advocate YouTube Legal Explainer
इस विषय पर विस्तृत कानूनी प्रक्रिया व समाधान समझने के लिए ऊपर दिया गया वीडियो देखें।

विधिक प्रतिवाद में उठाए जाने वाले प्रमुख बिंदु

  1. लेखा-जोखा व दंडात्मक ब्याज की जांच: बैंक द्वारा लगाए गए अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क (Penal Charges), अत्यधिक कंपाउंडिंग अथवा गलत प्रविष्टियों का विवरण मांगें।
  2. NPA वर्गीकरण की वैधानिकता: क्या खाते को NPA घोषित करते समय भारतीय रिजर्व बैंक के सर्कुलर की समय-सीमा का अक्षरशः पालन किया गया?
  3. पुनर्गठन अथवा एकमुश्त निपटान का प्रस्ताव: वास्तविक वित्तीय कठिनाई की स्थिति में विधिवत पुनर्भुगतान योजना अथवा OTS का प्रस्ताव दर्ज करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या धारा 13(2) नोटिस के विरुद्ध सीधे न्यायालय जाया जा सकता है?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार धारा 13(2) केवल एक मांग पत्र है, इसके खिलाफ सीधे DRT में केस नहीं बनता। इसका बचाव केवल धारा 13(3A) में लिखित आपत्ति देकर ही किया जा सकता है।

यदि बैंक 15 दिनों के भीतर आपत्ति का प्रत्युत्तर न दे तो?

यदि बैंक 15 दिनों में जवाब दिए बिना सीधे धारा 13(4) का पजेशन नोटिस जारी करता है, तो DRT ऐसी पूरी कार्रवाई को तत्काल रद्द कर देता है।

नोटिस का जवाब स्वयं देना चाहिए या अधिवक्ता के माध्यम से?

यह तकनीकी विधिक दस्तावेज है। किसी विशेषज्ञ सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी बिंदुओं को सुरक्षित रखते हुए ही उत्तर भिजवाना चाहिए।

विधिक परामर्श

Chamber of Hanmat Lodhi Advocate

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, नई दिल्ली एवं उच्च न्यायालय मध्य प्रदेश (जबलपुर) में नियमित पैरवी। किसी भी SARFAESI व DRT नोटिस पर विधिक परामर्श के लिए संपर्क करें।