मजिस्ट्रेट के धारा 14 आदेश का विधिक स्वरूप
धारा 13(4) नोटिस के उपरांत यदि भौतिक कब्जा प्राप्त नहीं होता, तो बैंक संबंधित जिले के District Magistrate अथवा Chief Metropolitan Magistrate के समक्ष आवेदन करता है। मजिस्ट्रेट बैंक द्वारा प्रस्तुत 9-सूत्रीय हलफनामे (Affidavit) की विधिक जांच के पश्चात तहसीलदार अथवा पुलिस बल को कब्जा दिलाने हेतु प्राधिकृत करता है।
प्रशासनिक आदेश को DRT में चुनौती
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार धारा 14 के तहत जारी आदेश अथवा तहसीलदार द्वारा की जाने वाली किसी भी कार्यवाही को SARFAESI की धारा 17 के तहत DRT में चुनौती दी जा सकती है:
- शपथपत्र में विधिक विसंगतियां: बैंक को धारा 14 आवेदन के साथ 9-बिंदुओं का शपथपत्र देना होता है। यदि बैंक ने कोई तथ्य छिपाया है अथवा गलत घोषणा की है, तो मजिस्ट्रेट का संपूर्ण आदेश निरस्त होने योग्य है।
- प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत: यदि बिना सूचना अथवा विधिक त्रुटियों के आधार पर जबरन बेदखली की जा रही है, तो उच्च न्यायालय में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका भी विचाराधीन हो सकती है।
प्रशासनिक अमले के आगमन पर आवश्यक कदम
- आदेश की प्रमाणित प्रति मांगें: तहसीलदार से DM/CMM द्वारा पारित आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि प्रस्तुत करने का अनुरोध करें।
- स्वेच्छा से सहमति देने से बचें: किसी भी स्वैच्छिक कब्जा सुपुर्दगी पत्र पर हस्ताक्षर न करें। असहमति को शांतिपूर्वक दर्ज कराएं।
- तत्काल ट्रिब्यूनल में स्थगन आवेदन: आदेश की प्रति प्राप्त होते ही अविलंब DRT में याचिका प्रस्तुत कर यथास्थिति (Status Quo) अथवा स्थगन आदेश हेतु आवेदन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या प्रशासनिक दल बिना पंचनामा बनाए ताला तोड़ सकता है?
तहसीलदार को उचित पंचनामा बनाना होता है और परिसर में मौजूद घरेलू सामान की सूची तैयार करनी होती है। वह मनमाने तरीके से बिना पंचनामा बनाए संपत्ति पर कब्जा नहीं ले सकता।
यदि परिसर में वैध किराएदार (Tenant) काबिज हो?
सुप्रीम कोर्ट के 'विशाल एन. काल्सिया' फैसले के अनुसार यदि वैध रेंट एग्रीमेंट है, तो बैंक धारा 14 के तहत किराएदार को जबरन बेदखल नहीं कर सकता।
मध्य प्रदेश में धारा 14 के आदेश के विरुद्ध कहां जाएं?
DRT जबलपुर में धारा 17 के तहत याचिका लगाई जाती है, अथवा आपातकालीन परिस्थितियों में MP High Court की संबंधित खंडपीठ में रिट याचिका दायर की जा सकती है।